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APJ Abdul Kalam history in hindi 2020?

APJ Abdul Kalam history in hindi 2020?

आज की पोस्ट में डॉ APJ Abdul Kalam के जीवन की कहानी ही नहीं बल्कि डॉ. कलाम के व्यक्तिगत एवं संघर्षों की कहानी के साथ अग्नि, पृथ्वी, आकाश ,त्रिशूल, और ,मिसाइलों के विकास की भी कहानी है जिसमें अंतर्गत स्तर पर भारत को मिसाल संपन्न देश के रूम में जगह दिलाई यह टेक्नोलॉजी एवं रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की आजादी की भी कहानी है

APJ Abdul Kalam history in hindi 2020?

APJ Abdul Kalam का पूरा नाम-अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम

जन्म-15 अक्टूबर, 1931

जन्म स्थान-तमिलनाडु( भारत)

पिता का नाम-जैनुलाब्दीन

माता का नाम-आशियम्मा

भारत के “11 राष्ट्रपति” कार्यकाल-25 जुलाई 2002 – 25 जुलाई 2007 

मृत्यु-27 जुलाई 2015 (83 वर्ष)

 

बचपन

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म  तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुसलमान परिवार जन्म हुआ था  इनके पिता जी का नाम जैनुलाब्दीन और माता का नाम आशियम्मा था उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था जो 19वीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था अब्दुल कलाम जी बचपन में मां के साथ रसोई में नीचे बैठकर खाना खाया करते थे वह केले के पत्ते बिछाकर खाना खाया करते हैं  खाने में घर का बना कर और नारियल की ताजा चटनी होती थी उनके पिता एक नाव के मालिक थे वह अपने परिवार का खर्चा चलाने के लिए समाचार पत्र भेजा करते थे उनके पिता का ध्यान सन 1976 में हो गया है 

 

शिक्षा 

जब स्कूल टाइम में कलाम जब चौथी कक्षा में थे तो उनके शिक्षक जिसका नाम राम कृष्ण था जब रामकिशन दूसरी कक्षा को पढ़ा रहे थे तब अनजाने में अब्दुल कलाम वहां से होकर निकल गया तब उनके शिक्षक ने उन्हें देख लिया तो उन्हें उसी टाइम उन्हें पकड़ लिया और भरी कक्षा के सामने उसको डंडे लगाएं तभी आगे कुछ महीनों बाद गणित में कलाम जी पूरे नंबर लेकर आए तो प्रार्थना के टाइम उन्हें सम्मानित किया गया जब कलाम श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद वह सबसे नजदीक सेंट जोसेफ कॉलेज तिरुचिरापल्ली में सबसे नजदीक कॉलेज था वहां उन्होंने सन 1950 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए सेंट जोसेफ कॉलेज में दाखिला लिया 

 

नौकरी 

जब कॉलेज में शिक्षा पूरी हो गई तो वह इंजीनियर बन कर निकले तब उनके सामने नौकरी के दो बड़े अफसर थे दोनों ही उनके सपनों को पूरा करने वाले थे पहला अवसर भारतीय वायुसेना का था और दूसरा रक्षा मंत्रालय के तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय डीडीटी मे था  तब उन्होंने सोचा उनके पास दो सुनहरे मौके थे उन्होंने दोनों फॉर्म अप्लाई कर दिए तब उन्हें दोनों नौकरियों से बुलावा आया

उन्होंने वायु सेना भर्ती होने के लिए देहरादून बुलाया गया और डीडीटी के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया गया इन दोनों जो में से वायु सेना में कलाम जी का सिलेक्शन नहीं हुआवायु सेना में केवल 8 व्यक्ति लेने थे लेकिन कलाम जी का नौवां स्थान था इसलिए उनका सिलेक्शन नहीं हुआ लेकिन दिल्ली मैं डीडीटी में उनका सिलेक्शन हो गया 

 

वैज्ञानिक जीवन 

 

1960 में कलाम जी ने तमिलनाडु इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अपनी स्नातक  पूरी करने के बाद (रक्षा अनुसंधान एवं विकास सेवा) Defence Research & Development Service (DRDS) मैं सदस्य बने उसके बाद में एक वैज्ञानिक बने एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने करियर की शुरुआत एक छोटे से होवरक्राफ्ट को डिजाइन करके की, इसके बाद में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) में काम किया उन्होंने वहां भारत के पहले सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल ( SLV -III) प्रयोजना के निर्देशक बने  वहां उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर काम किया सन 18 जुलाई 1980 को सुबह 8:03 पर श्रीहरिकोटा रॉकेट केंद्र से ( SLV -III)  ने उड़ान भरी और इस प्रोजेक्ट पर उन्हें सफलता हासिल हुई

1.1974 में भारत  द्वारा पहला परमाणु परीक्षण किया गया

2.1998 में भारत ने दूसरा पोखरण परमाणु परीक्षण किया गया 

इस सफलता के बाद प्रोफ़ेसर धवन वह डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मिलने के लिए बुलाया तब दोनों संसद भवन पहुंचे वहां पर श्रीमती गांधी ने प्रोफेसर धवन के सभी सदस्यों का धन्यवाद कियाउसके बाद में डॉ कलाम ने ( SLV -III) के बारे में जिक्र किया उन्होंने कहा ( SLV -III) की स्पीड 25000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से छोड़ा जा चुका है उसके बाद वहां बैठे सदस्यों ने उनका धन्यवाद किया उसके बाद में 1981 में गणतंत्र दिवस पर पदम भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की 

उन्होंने अपनी टीम के साथ 20 नवंबर 1967 को जब टी ई आर एल एस से पहला रोहिणी 75 रॉकेट लॉन्च किया गया उसके बाद में प्रोफेसर साराभाई ने उन्हें अगले साल तत्काल दिल्ली मिलने को बुलाया गया तब साराभाई ने उन्हें वायु सेना के मुख्यालय से आए हुए ग्रुप कैप्टन वी. एस. नारायण से मुलाकात करवाई उसके बाद में उन्होंने 1970 और 1990  के बीच, कलाम ने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) और SLV-III प्रोजेक्ट  कार्य करने का प्रयास किया , दोनों ही प्रोजेक्ट पर सफलता हासिल हुई 

 

राष्ट्रपति दौर   “25 जुलाई 2002 – 25 जुलाई 2007 “

वह भारतीय जनता पार्टी से थे 24 जुलाई को राष्ट्रपति की शपथ ली उसके बाद में राष्ट्रीय राष्ट्रपति भवन में अपना कार्यकाल संभाला कलाम जी भारत के तीसरे ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया1.डॉ। सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1954) 2.Dr. जाकिर हुसैन(1963) 3.डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम (2002) वह पहले वैज्ञानिक थे जो राष्ट्रपति नियुक्त हुए राष्ट्रपति को क्षमा प्रदान करने और मृत्युदंड पर दोषियों को मौत की सजा को माफ कराने का अधिकार होता है।  राष्ट्रपति ने अपने 5 साल के कार्यकाल के दौरान एक ही दया याचिका पर काम किया बलात्कारी की याचिका को खारिज कर दिया उसके बाद में उन्हें फांसी दे दी गई 

 

पुरस्कार और सम्मान

भारत देश और समाज के लिए उन्होंने कई कार्य किए उन्होंने वैज्ञानिक जीवन में भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया  कलाम जी को 40 विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि  मिली थी भारत  सरकार ने भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया और 2002 में उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया जो भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है 

 

मृत्यु 

23 जुलाई 2015 को भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ‘भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलॉन्ग’ में पहुंचे वहां जब वह सीढ़ियों पर चल रहे थे उस समय उनको  असुविधा अनुभवी  लेकिन वहां पर थोड़ी देर आराम किया उसके बाद में सभागार में प्रवेश किया वहां पर  5 मिनट उनकी हालत ज्यादा गंभीर हो गई उन्हें नजदीकी  बेथानी हॉस्पिटल ले जा गया  लेकिन वहां पर उनकी मृत्यु हो गई उनकी मृत्यु के बाद उनका पार्थिव शरीर भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर में दिल्ली ले जाया गया

वहां पर राष्ट्रपति ,उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ,और दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उन्हें पुष्प अर्पित किए उसके बाद में कलाम के शरीर को उनके गांव धनुषकोडी ‘रामेश्वरम’ ले जाया गया 30 जुलाई 2015 को  कलाम को अंतिम संस्कार किया गयाअंतिम संस्कार के समय वहां लगभग 350000 लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई जिनमें प्रधानमंत्री, केरल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री तमिलनाडु के राज्यपाल और कर्नाटक के राज्यपाल, भी शामिल थे 

 

(कविता) ज्ञान का दीपक जलाए रखूंगा 

“हे भारतीय युवक ज्ञान विज्ञान

 मानवता के प्रेमी संस्कृत लक्ष्य

की लालसा पाप है मेरे सपने बड़े हैं

 मैं मेहनत करूंगा मेरा देश महान हो

धनवान हो गुणवान हो

यह प्रेरणा का भाव अमूल्य है 

कहीं भी धरती पर उससे ऊपर या नीचे

दीप जलाए रखूंगा 

जिससे मेरा देश महान हो

 

 

Guru Nanak Dev Ji History in Hindi 2020

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