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Nelson Mandela कैदी से राष्ट्रपति बनने की biography 2020

Nelson Mandela कैदी से राष्ट्रपति बनने की biography 2020

 

Nelson Mandela/नेल्सन मंडेला history in Hindi 2020

रोहिल्लाहला मंडेला (Nelson Mandela का जन्म-18 जुलाई 1918 को हुआ था 

पिताका नाम-गादला हेनरी म्फाकनिस्वा मंडेला

माता का नाम-नोसकेनी 

देश-दक्षिणी अफ्रीका

मृत्यु– 5 दिसंबर 2013 जोहान्सबर्ग

नेल्सन मंडेला 3 शादियां हुई थी 

Nelson Mandela कैदी से राष्ट्रपति

भारत ने उन्हें 1990 में सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया। मंडेला, भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी व्यक्ति हैं।

 

बचपन

नेल्सन मंडेला का जन्म, 18 जुलाई 1918 को राजघराने में जन्म हुआ था.। उनके पिता का नाम गादला हेनरी, म्फाकनिस्वा मंडेला था। और उनकी माता का नाम नोसकेनी, था. वह  खोसा, जाति से संबंध रखते हैं। जिस जगह .मंडेला रहता था। उस जगह को थेंबू,कहा था। नेल्सन, के पिता को अंग्रेज मजिस्ट्रेट, उनके मुखिया पद से बेदखल कर दिया था। इस विरोध के .लिए मंडेला ने अपनी धन-संपत्ति भी खोनी पड़ी

लेकिन अंग्रेजों के सामने झुकेनहीं इस घटना के बाद मंडेला की माता अपने .बच्चों को लेकर पास के गांव कुनू चली गई। कुनू  पहाड़ी की घाटी में बसा एक .छोटा सा गांव था। उसके आसपास में कई नदियां बहती थी। इसके बाद में मंडेला का जीवन बहुत ही गरीबी में .बीता महलों को छोड़कर वह झोपड़ियों में रहने लगे। 

 

 

 

आरंभिक शिक्षा 

कुनू गांव में लोग बहुत ही कम पढ़े लिखे थे। वहां के बच्चे पढ़ने की बजाय बड़ों की बातें सुनकर भाषा का ज्ञान व अन्य जानकारी प्राप्त करते थे। उसके बाद में जब स्कूल जाने लगा स्कूल जाने के लिए उसके पिता ने अपनी एक पतलून दी उस पतलून को उन्होंने घुटनों तक काट दिया। और फिर मंडेला की कमर पर उस पतलून को सुतली से बांध दिया। यह पहनावा देखकर नेल्सन बहुत ही खुश हुआ।

जब मंडेला स्कूल, में गया तो उसके टीचर  मिस डीगेने ने उनको एक नया अंग्रेजी, नाम  दिया था। स्कूल में बच्चों को नया नाम इसलिए दिया जाता था। कि अफ्रीकी, बच्चे थे। उनका अलग नाम होता था। और अंग्रेजों, के बच्चे होते थे। उनका अलग नाम दिया जाता था। 

राजा जोगिनतांबा, Nelson Mandela से कहा करते थे। याद रखो कि तुम आम आदमी की तरह  गोरो की खदानों में काम करने के लिए पैदा नहीं हुए। हो ना ही किसी की ,गुलामी करने के लिए पैदा हुए। हो जब स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद कॉलेज में दाखिला ले लिया। उस कॉलेज, में लगभग 150 के छात्र थे। नेल्सन, ने अपनी पहली साल की पढ़ाई, अंग्रेजी, राजनीतिक, विज्ञान,आदिवासी प्रशासन व कानून का अध्ययन किया रविवार के दिन मंडेला स्कूलों में बाईबल पढ़ाने के लिए जाते थे। 

 

नौकरी

नेल्सन मंडेला, को अंग्रेजों की कंपनी में काम मिला उस कंपनी, में असेववेतो को भी काम पर रखा जाता था। इसी कारण से उनको उस कंपनी में जॉब मिली नेल्सन को उस कंपनी में दफ्तर में एक सहायक का काम मिला उस कंपनी के मालिक, ने उन्हें समझाया कि कि तुम पढ़ लिख करअच्छे वकील बनो। इस कंपनी में तुम्हारे लिए ठीक नहीं है। लेकिन कुछ टाइम उसने उस कंपनी में नौकरी की वहां रहने के लिए उसने एक कमरा किराए पर लिया। 

वह कमरा छोटा सा और उसकी छत टिन, की थी। और एक झोपड़ी, आकार में यह कमरा बनाया हुआ था। उसका सारा दिन दफ्तर में बीत जाया करता था। और रात को आकर वह पढ़ाई करता था। वह कानून, की डिग्री, में पढ़ाई कर रहा था। नेल्सन कम्युनिस्ट, पार्टी का सदस्य भी था। मंडेला कई कई दिन भूखा भी रहना पड़ता था। क्योंकि उसे थोड़ी सी आमदनी में से उनको को पढ़ाई की फीस भी और घर का किराया भी देना पड़ता था। 

जहां पर वह रहते थे। उसे अंधेरी बस्ती कहते थे। इस अंधेरे में रात को आना जाना भी खतरे से खाली ना था। चोर चकारे मौका देखकर वह सामान लूट लेते थे। चारों तरफ गंदगी गरीबी बदहाली का वातावरण था। लेकिन उनके इरादे बहुत मजबूत थे। 

 

विवाह 

नेल्सन की शादी एवलिन, से  हुई थी। उनकी शादी अक्टूबर 1944 मैं हुई थी। एवलिन, के माता-पिता नहीं थे। जब वह 12 वर्ष की थी। तभी उसकी माता का निधन हो गया था। शादी करने के बाद वह दोनों अपने भाई, के पास किराए के मकान में रहने लगे। Nelson Mandela की वकालत की पढ़ाई पूरी नहीं हुई थी। अभी भी वह उस कंपनी में नौकरी कर रहे थे। 

जिससे उनका गुजारा बहुत ही मुश्किल से हो रहा था।  फरवरी 1945 में उनका पहला बेटा, हुआ  उन्होंने उनका नाम मदीबा थेम्बी, रखा था। और उसके बाद 1947 मैं उनको दूसरे बेटी हुई उसका नाम मकाज़ी, था।  लेकिन 10 महीने बाद उस उनकी बेटी की मृत्यु, हो गई उसके बाद में 1958 में उसका उसकी पत्नी के साथ तलाक, हो गया। 

 

राजनीतिक 

मंडेला 1943 को अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस पार्टी, में शामिल हुए उसके बाद उन्होंने ए एन जी यूथ लीग, के संस्थापक बने थे। 1939 में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ।

इसमें उन्होंने वोट देने के अधिकार की मांग की रंगभेद का अंत करने के लिए यह मांग की उसके बाद में नेल्सन मंडेला वह उनके साथी ओलीवर टोम्बो, ने साथ मिलकर रंगभेद, के खिलाफ आवाज उठाई इस कारण से 1956 में उन्हें 4 साल के लिए जेल में डाल दिया गया। 

दिसंबर 1950 में मंडेला को युवा लिंग का अध्यक्ष, बनाया गया।अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले रंगभेद कानूनों का विरोध करने की योजना तैयार की थी। उसके बाद 14 जून 1958 ने मंडेला ने दूसरी शादी कर ली उसका नाम माडीकिजेला था। माडीकिजेला नेल्सन मंडेला को जेल से छुडवाने में  मदद की थी। 

उसके बाद मैंने छोड़ दिया गया। 5 अगस्त 1962 में अफ्रीकी खान मजदूर यूनियन ने खान मजदूरों के शोषण का विरोध करते हुए हड़ताल की थी। कि खान मजदूरों को 2 सीलिंग के हिसाब से  दिहाड़ी मिलती थी। लेकिन उस यूनियन की मांग थी।कि उन्हें  बढ़ाकर 10 सीलिंग किया जाए इस कारण से Nelson Mandela पर मुकदमा दर्ज हो गया। 1964 में उन्हें उम्र कैद की सजा सुना दी गई उम्र के 27 साल जेल में बिताने के बाद 1990 में उनको रिहा कर दिया गया।

 

राष्ट्रपति 

10 मई 1994 को नेल्सन मंडेला दक्षिणी अफ्रीका के राष्ट्रपति, बने 1998 में अपने 80 वें जन्मदिन पर मंडेला ने तीसरी पत्नी, ग्रेका मैचल से शादी कर ली। 1999 में मंडेला ने अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद अपना राष्ट्रपति पद छोड़ दिया।उसके बाद नवंबर 2009 को संत राष्ट्र महासभा ने रंगभेद का संग्रह किया था। उसी के सम्मान में उन्हें 18 जुलाई मंडेला दिवस, के रूप में मनाने की घोषणा की। 5 दिसंबर 2013 को जोहान्सबर्ग में उनके घर पर उनकी मृत्यु हो गई। जब उनकी मृत्यु हुई वह 95 वर्ष के थे।

 

पुरस्कार और सम्मान

नेल्सन मंडेला को 695 से अधिक पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं और इन पुरस्कारों में नोबल शांति पुरस्कार और अमेरिका कांग्रेस पदक शामिल हैं।नेल्सन मंडेला नाम पर कई इमारतों के नाम रखे गए हैं। उनके नाम से कई देशों में पुरस्कार भी दिए गए।

(1964) —– यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन के विद्यार्थी संघ के मानद अध्यक्ष निर्वाचित।

(1965)—-लीड्स यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन के विद्यार्थी संघ के मानद अध्यक्ष निर्वाचित।

(1973)—- लीड्स यूनिवर्सिटी में खोजे गए एक नाभिकीय अणु पुरस्कार।

(1982)—- 53 देशों के 2,000 मेयरों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर करके मंडेला को रिहा करने की अपील की।

(1983)—-रोम की मानद नागरिकता (फरवरी)। ओलंपिया, ग्रीस की मानद नागरिकता

(1984) —- जर्मन लोकतांत्रिक गणतंत्र में ‘नेल्सन मंडेला’ नाम से एक स्कूल खोला गया।

(1985—-रियो द जेनेरियो, ब्राजील की मानद नागरिकता। लंदन में नेल्सन मंडेला की मूर्ति लगी।

(1986)—-वर्कर्स इंटरनेशनल सेंटर, स्टॉकहोम, स्वीडन द्वारा इंटरनेशनल पीस ऐंड फ्रीडम पुरस्कार।

(1987)—-फ्रीडम ऑफ द सिटी ऑफ सिडनी, ऑस्ट्रेलिया पर पानेवाले पहले व्यक्ति।

(1988) —- नई दिल्ली में एक सड़क का नामकरण ‘नेल्सन मंडेला मार्ग’ किया गया।

(1989)—-टिपेरासी शांति समिति, आयरलैंड का शांति पुरस्कार।

(1990)—-5 मार्च को जिंबाब्बे में ‘मंडेला दिवस’ को सार्वजनिक अवकाश घोषित। इस वर्ष के लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित। अक्तूबर में भारत के सर्वोच्च नागरिक                   सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित।भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी व्यक्ति हैं।

(1991)—- कार्ट मेनिल मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित (8 दिसंबर)

(1992—- का यूनेस्को शांति पुरस्कार 3 फरवरी, पेरिस में दिया गया। पाकिस्तान सरकार द्वारा ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ पुरस्कार से सम्मानित (3 अक्तूबर)।

(1993—-टाइम’ पत्रिका में 100 सबसे प्रभावशाली व्यकि की सूची में शामिल।

(2005) —-टाइम पत्रिका में 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल होना। एम्हेर्सट कॉलेज की मानद उपाधि।

(2006)—-एम्नेस्टी इंटरनेशनल्स एंबेसडर ऑफ कंसाइंस अवार्टी यूनिवर्सिटी टेक्नोलॉजी मारा, मलेशिया द्वारा मानद
उपाधि।

(2007)—-लंदन संसद् के सामने मंडेला की आदमकद मूर्ति लगाने की योजना पर कार्य। बेलग्रेड, सर्बिया के मानद नागरिक।

(2008)—-मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा मानद उपाधि।

(2009)—-आर्थर ऐश करेज अवार्ड। नवंबर 2009 में संयुक्त राष्ट्र की आम सभा ने 18 जुलाई को ‘मंडेला दिवस’ घोषित किया।

(2010)—लॉरेट इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी नेटवर्क द्वारा छह मानद उपाधियाँ।

 

जीवन-यात्रा

“संघर्ष ही मेरा जीवन है। मैं अपने अंतिम
,समय तक स्वाधीनता के लिए लड़ता रहूंगा।”

(18 जुलाई, 1918)—-दक्षिण अफ्रीका के ट्रांस्की क्षेत्र के मैजो गाँव में जन्म।

(1920)—- मंडेला अपनी माता व बहनों के साथ कूनू में रहने आए।

(1925)—-कूनू के स्कूल में प्रवेश।

(1927)—- पिता का निधन। मंडेला जोगिनताबा के संरक्षण में रहने के लिए केजवैनी आए।

(1934) —-क्लार्कबरी बोर्डिंग इंस्टीट्यूट में प्रवेश।

(1938)—- फोर्ट हारे विश्वविद्यालय में प्रवेश।

(1942)— पत्राचार के माध्यम से साउथ अफ्रीका यूनिवर्सिटी से स्नातक।जोहांसबर्ग के विटवाटरसरैंड विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई आरंभ की।अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ए.एन.सी.) के सदस्य बने।

(1944) —-एवलिन मेस से विवाह।

(1947)—- ए.एन.सी.वाई.एल. के सचिव बने।

(1950)—- ए.एन.सी. की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सचिव निर्वाचित।

(1952)—- ए.एन.सी. के अवज्ञा आंदोलन के वालंटियर इन-चीफ बने।

(1957)—- एवलिन से तलाक।

(1958)—- विनी मदिकजैला से विवाह।

(1961)—- ए.एन.सी. की सशस्त्र सेना के प्रधान सेनानायक बने।

(1962) —-अन्य राष्ट्रों के दौरे के लिए गुप्त रूप से दक्षिण अफ्रीका से निकले।

(1963)—- ए.एन.सी. के गुप्त मुख्यालय का पता चल जाने पर जेल में ही तोड़-फोड़ करने का आरोप लगा।

(1964)— रिवोनिया मुकदमा संपूर्ण। आजीवन कारावास की सजा।

(1975)—- जेल में संस्मरण लिखने आरंभ किए। इन्हें गुप्त रूप से जेल से बाहर भेजा जाता था।

(1980) —-संयुक्त राष्ट्र संघ की मंडेला को रिहा । करने की अपील।

1982)— केपटाउन के निकट पार्ल जेल में स्थानांतरित।

(1989) —राष्ट्रपति बोथा से मुलाकात। रिहाई की वार्ता नए राष्ट्रपति एफ.डब्ल्यू.डी. क्लार्क से मुलाकात।

(11 फरवरी, 1990) —-27 साल के बाद जेल से रिहा।

(5 जुलाई, 1990)—-ए.एन.सी. के अध्यक्ष निर्वाचित।

(1993)—- मंडेला और क्लार्क को संयुक्त रूप से नोबल शांति पुरस्कार मिला।

(1994)—- मंडेला की आत्मकथा प्रकाशित।

(10 मई, 1994)—-दक्षिण अफ्रीका के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित 75 वर्षीय सबसे वयोवृद्ध राष्ट्रपति बने।

(1996 —-विनी मंडेला से तलाक।

(1998 —-ग्रेसा मिशेल से विवाह।

(1999) —-पाँच वर्ष का राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने पर सक्रिय राजनीति से संन्यास।

(2004)—- में जोहनसबर्ग में स्थित शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति की स्थापित की गयी। और उस सेंटर का नाम बदलकर Nelson Mandela रख दिया गया।

(2009) —-को संत राष्ट्र महासभा ने रंगभेद का संग्रह किया था। उसी के सम्मान में उन्हें 18 जुलाई मंडेला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा।

 

“कोई भी लक्ष्य जब तक प्राप्त नहीं कर 

लिया जाता, तब तक असंभव ही लगता है।” 

 

 

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